अध्याय 45: फिरकी की तीसरी चाल और बेबाक शर्त
सिमरन का यह बेबाक फरमान सुनते ही पूरे हॉल में हँसी का एक ज़बरदस्त फ़व्वारा फूट पड़ा। आवारे लड़कों की आँखें फटी की फटी रह गईं, जबकि नेहा अपने पेट पर हाथ रखकर कालीन पर लोट-पोट होने लगी।
"वाह सिमरन रानी! तेरी शर्तें तो हर बार पहले से भी ज़्यादा कड़क और नटखट होती जा रही हैं!" नेहा ने तालियाँ बजाते हुए ठहाका लगाया।
सिमरन ने सोफ़े पर पसरे-पसरे ही अपनी पतली कमर को मटकाया, अपने पैरों में बंधे घुँघरुओं को एक बार फिर 'छन-छन' करके छनकाया और...
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